बैम्बू (बाँस) बायोचार

बाँस बायोचार एक प्राकृतिक मिट्टी सुधारक है, जिसे बाँस को कम ऑक्सीजन में बहुत अधिक तापमान पर गर्म करके बनाया जाता है। इस प्रक्रिया को पायरोलिसिस (Pyrolysis) कहा जाता है। इसमें बाँस शुद्ध और स्थिर कार्बन में बदल जाता है, जिसकी संरचना स्पंज जैसी और छिद्रों से भरी होती है। यह संरचना बायोचार को पानी, पोषक तत्व और लाभकारी मिट्टी के जीवाणुओं को पकड़कर रखने में मदद करती है, जिससे मिट्टी स्वस्थ, जीवंत और उपजाऊ बनती है।

1/9/20261 min read

क्या है बैम्बू (बाँस) बायोचार?

एक प्रकार का कोयला जो मिट्टी को बेहतर बनाता है और जो विशेष रूप से बाँस से बनाया जाता है उसे बैम्बू बायोचार कहते हैं। इसे पायरोलिसिस नामक प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है जिसमें बाँस को कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में 700 से 1000 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर गर्म करते हैं। इस प्रक्रिया से अत्यधिक छिद्रपूर्ण, झरझरा और कार्बन से भरपूर पदार्थ बनता है जो न केवल मिट्टी में डलकर उसे बेहतर बनाता है, बल्कि अच्छे जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर पौधों की स्वास्थ्य-वृद्धि में भी मदद करता है।

बाँस ही क्यों?

बाँस पृथ्वी पर सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले पौधों में से एक है। एक बार रोपण के बाद यह पुनः अपने आप उग आता है और दोबारा बोने की आवश्यकता नहीं होती। यह बिना खाद के भी अच्छी तरह बढ़ता है और मिट्टी को पुनर्जीवित करने में मदद करता है।

बाँस की संरचना प्राकृतिक रूप से खोखली और रेशेदार होती है, इसलिए जब इसे बायोचार में परिवर्तित किया जाता है, तो यह एक विशेष प्रकार का कार्बन बनाता है जिसका सर्फेस एरिया अत्यधिक होता है — अर्थात् इसमें पानी और पोषक तत्वों को धारण करने के लिए अधिक सूक्ष्म छिद्र (पोर्स) होते हैं।

बाँस के बायोचार के फायदे:

बाँस के बायोचार के फायदे निम्नानुसार हैं :

  • अत्यधिक छिद्रयुक्त: बाँस की प्राकृतिक नलीदार संरचना में बहुत छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जो पानी को संचित रखते हैं। इससे पौधों को छोटी सूखी अवधियों के दौरान नमी बनाए रखने और ताज़ा रहने में मदद मिलती है।

  • पोषक तत्वों का भण्डार: बायोचार की प्राकृतिक ऋणात्मक विद्युत-आवेश (नेगेटिव चार्ज) क्षमता पोटैशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों (पॉजिटिव चार्ज) को पकड़े रखती है और उन्हें धीरे-धीरे पौधों की जड़ों तक पहुँचाती है। इससे पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है जिससे वह हरे-भरे और स्वस्थ रहते हैं।

  • पर्यावरण-अनुकूल (एन्वॉयरमेंट फ्रेंडली) व स्थायी: बाँस बहुत तेज़ी से बढ़ता है और बड़ी मात्रा में CO₂ सोखता है। इसका बायोचार मजबूत, स्थिर और मिट्टी में लंबे समय तक टिकने वाला होता है—ओक जैसे कठोर लकड़ी से बने बायोचार जितना टिकाऊ, वरन अधिक नवीकरणीय (रिन्यूएबल) और पर्यावरण-हितैषी।

उपयोग करने का तरीका:

उपयोग करने का तरीका:

अनुपात: 1 भाग बायोचार को 4–5 भाग मिट्टी में मिलाएँ (मिश्रण में बायोचार लगभग 20–25% होना चाहिए)

  • नया पौधा लगाते समय: पौधा लगाने से पहले बायोचार को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएँ; अथवा

  • पहले से लगे पौधों के लिए: उसी अनुपात में बायोचार को पानी में भिगोकर अच्छी तरह मिलाएँ और यह मिश्रण पौधे के आसपास डालें। चूँकि बायोचार नमी को लंबे समय तक बनाए रखता है, इसलिए पौधे को आवश्यकता अनुसार कम बार पानी दें।

बैम्बू बायोचार मिट्टी में कैसे काम करता है:

जब बैम्बू बायोचार को मिट्टी में मिलाया जाता है, तो यह इस तरह काम करता है:

1. पोषक तत्वों का स्पंज

इसके छोटे-छोटे छिद्र पोषक तत्वों को सोख लेते हैं और उन्हें जड़ों के पास बनाए रखते हैं, जिससे वे बारिश में बहते नहीं हैं।

2. पानी रोकने वाला

ये छिद्र पानी को भी पकड़कर रखते हैं, जिससे मिट्टी ज़्यादा समय तक नम रहती है और बार-बार पानी देने की ज़रूरत कम होती है।

3. अच्छे जीवाणुओं का घर

इन छिद्रों में मिट्टी के अच्छे सूक्ष्म जीव रहते हैं। ये जीव जैविक पदार्थ को तोड़ते हैं, पोषक तत्व छोड़ते हैं और जड़ों को मज़बूत बनाते हैं।

4. मिट्टी को नरम बनाने वाला

बायोचार सख़्त और जमी हुई मिट्टी को ढीला, हल्का और सांस लेने योग्य बनाता है, जिससे जड़ें आसानी से फैलती हैं, ज़्यादा पोषण लेती हैं और मज़बूती से बढ़ती हैं।